अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड वार्ता को लेकर लोग क्या गलत समझ रहे हैं

अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड वार्ता को लेकर लोग क्या गलत समझ रहे हैं

स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक रिसॉर्ट में जो कुछ हुआ, उसे सिर्फ एक सामान्य कूटनीतिक मुलाकात समझना सबसे बड़ी भूल होगी। जब लोग हेडलाइंस पढ़ रहे थे, तब पर्दे के पीछे 10 घंटे से ज्यादा लंबी मैराथन बातचीत चल रही थी। यह कोई सामान्य बैठक नहीं थी। इसमें सीधे तौर पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी राजनयिक आमने-सामने बैठे थे। मध्यस्थ की भूमिका में कतर और पाकिस्तान मौजूद थे।

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अगर आप सोच रहे हैं कि इस बातचीत से रातों-रात मिडिल ईस्ट में शांति आ जाएगी, तो आप हकीकत से दूर हैं। कूटनीति इतनी आसान नहीं होती। लेकिन इस बैठक ने कुछ ऐसे रास्ते खोले हैं, जिनकी उम्मीद किसी को नहीं थी। चलिए सीधे उन मुद्दों पर बात करते हैं जो इस बातचीत के केंद्र में थे।

क्या वाकई लेबनान में थम जाएगी जंग

सबसे बड़ा औरImmediate मुद्दा लेबनान का था। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है। इस बैठक में दोनों देश एक 'डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल' (De-confliction Cell) बनाने पर सहमत हुए हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर जमीन पर कोई सैन्य गड़बड़ी होती है, तो उसे तुरंत सुलझाने के लिए एक डायरेक्ट चैनल होगा। To understand the bigger picture, check out the recent article by TIME.

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे पहला असली टेस्ट माना है। बात बिल्कुल साफ है। जब तक जमीन पर गोलीबारी बंद नहीं होती, कागजी समझौतों का कोई मोल नहीं है।

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हॉर्मुज जलडमरूमध्य का नया कम्युनीकेशन लिंक

दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल जहां से गुजरता है, उस स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Hormuz Strait) को लेकर ईरान ने हाल ही में कड़े तेवर दिखाए थे। ईरान ने धमकी दी थी कि वह इस रास्ते को बंद कर देगा। इस धमकी के बाद कच्चे तेल की कीमतें अचानक तीन फीसदी तक बढ़ गईं।

इस संकट को टालने के लिए स्विट्जरलैंड में एक स्पेशल कम्युनीकेशन लाइन स्थापित करने पर सहमति बनी। इसका मकसद सिर्फ एक है कि व्यापारिक जहाजों को बिना किसी रुकावट के सुरक्षित रास्ता मिले। यह कम्युनीकेशन लाइन अगले 60 दिनों के लिए एक्टिव रहेगी।

प्रतिबंधों और फ्रीज एसेट्स का पेचीदा खेल

ईरान के विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उनकी कुछ फ्रीज संपत्तियों को रिलीज करने और तेल निर्यात पर से प्रतिबंध हटाने पर सहमति बनी है। हालांकि, कतर और पाकिस्तान के आधिकारिक संयुक्त बयान में इस बात का सीधा जिक्र नहीं था। यहीं पर असली पेंच फंसता है।

अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह रोक लगाए। दूसरी तरफ, ईरान बिना आर्थिक राहत के एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई बहुत गहरी है।

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कतर और पाकिस्तान की भूमिका

इस पूरी बातचीत को संभव बनाने में कतर और पाकिस्तान ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। दोनों देशों ने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के तहत इन दोनों कट्टर दुश्मनों को एक मेज पर ला खड़ा किया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि यह वार्ता कितनी गंभीर थी।

अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते तक पहुंचने का रोडमैप तैयार किया गया है। तकनीकी स्तर की बातचीत पूरे हफ्ते बर्गनस्टॉक रिसॉर्ट में जारी रहेगी।

यदि आप इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखना चाहते हैं, तो इन तीन चीजों पर ध्यान दें। सबसे पहले, लेबनान सीमा पर संघर्ष की तीव्रता को देखें। दूसरा, वैश्विक तेल बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव की निगरानी करें। तीसरा, अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अगले तकनीकी दौर के बयानों को बारीकी से पढ़ें।

EY

Emily Yang

An enthusiastic storyteller, Emily Yang captures the human element behind every headline, giving voice to perspectives often overlooked by mainstream media.